मंगलवार, 2 अक्टूबर 2012

एक बार फिर हिंदी मीडिया टॉप पर

एक बार फिर हिंदी मीडिया टॉप पर है, आई आर एस (Q2 2012) के ताज़ा पाठक सर्वे में शीर्ष पांच अखबार में चार हिंदी के हैं , दैनिक जागरण शीर्ष पर बना हुआ है . दुसरे नं पर भास्कर है . तीसरे नं पर हिंदुस्तान है . चौथे नं पर मलयाला मनोरमा है तथा पांचवे पर अमर उजाला है. यह पुरे देश में हिंदी का प्रभुत्व साबित करता है. यह सही मायने में राष्ट्रभाषा है . देश में छपने वाले सभी अंग्रेजी अख़बारों के पाठक संख्या को एक साथ मिला दिया जाय तो भी दैनिक जागरण के पाठक संख्या से कम होगा . 

मंगलवार, 29 जून 2010

क्रिकेट की भाषा हिन्दी हो

दुनिया मे क्रिकेट के सबसे ज्यादा दर्शक हिंदीभाषी हैं फिर भी यह क्रिकेट की भाषा नही है । दुनिया मे क्रिकेट के दर्शक 55 करोर हिंदीभाषी, 22 करोर बंगाली, 11 करोर पंजाबी, 8 करोर तेलगु, 8 करोर मराठी, 8 करोर अंग्रेजी हैं । दर्शकों की संख्या के लिहाज से अंग्रेजी भाषी चौथे नंबर पर आते हैं फिर भी यह क्रिकेट की भाषा है । क्रिकेट मुख्यतः भारत, पाकिस्तान, इंगलैंड, आस्ट्रेलिया, वेस्ट इंडीज, दक्षिण अफ्रिका, न्युजीलैंड, जिम्बाब्बे, श्री लंका तथा बांग्लादेश मे देखी जाती है । इन देशों की कुल जंसंख्या 170 करोर है । इनमे 55 करोर हिंदीभाषी है।

सोमवार, 21 जुलाई 2008

हिन्दी 2050

हिन्दी ( उर्दु ) 2050 तक अंतर्राष्ट्रीय भाषा होगी । एक अनुमान के अनुसार 2050 तक हिन्दी बोलने वालों की संख्या 2 बिलियन पार कर जायेगी । इसके पीछे कई मौलिक कारण हैं । मसलन भारत की जन्संख्या 1.6 बिलियन के पार होगी । इनमे से 95 फीसदी जन्संख्या हिन्दी बोलने वालों की होगी । 50 फीसदी की मौलिक भाषा होगी तथा 45 फीसदी की द्वीतीय भाषा होगी । इसी तरह पाकिस्तान तथा बांग्लादेश की कुल जंसंख्या 600 मिलीयन से ज्यादा होगी । इनमे से 5 फीसदी की मौलिक तथा 75 फीसदी की द्वितीय भाषा होगी । इस तरह भारतीय उपमहाद्वीप मे हिंदी ( उर्दु ) बोलने वालों की संख्या 1.9 बिलीयन के आसपास होगी । इसके अलावा फिजी, नेपाल, लंका, सऊदी अरब, मारिसस, सूरीनाम आदि देशों मे अच्छी संख्या मे हिंदी बोलने वाले होंगे ।

मंगलवार, 8 मई 2007

2050 में विश्व मे भाषाओं की स्थिति

विश्व मे भाषाओं की स्थिति 2050 में ( बोलने वालों की संख्या )
भाषा मातृभाषा द्वीतीय भाषा तृतीय भाषा कुल (मीलियन)
1. हिंदी ( उर्दु ) 835 950 350 2135
2. मंडारिन (चाइनीज) 1300 250 500 2050
3. अरबी 560 110 60 730
4. अंग्रेजी (इंगलिश) 310 130 250 690
5. स्पेनिश 420 150 50 620

हिन्दी ( उर्दु ) 2050 तक अंतर्राष्ट्रीय भाषा होगी । एक अनुमान के अनुसार 2050 तक हिन्दी बोलने वालों की संख्या 2 बिलियन पार कर जायेगी । इसके पीछे कई मौलिक कारण हैं । मसलन भारत की जन्संख्या 1.6 बिलियन के पार होगी । इनमे से 99 फीसदी जन्संख्या हिन्दी बोलने वालों की होगी । 55 फीसदी की मौलिक भाषा होगी तथा 44 फीसदी की द्वीतीय तृतीय भाषा होगी । इसी तरह पाकिस्तान की जंसंख्या ३४ करोड़ के आसपास होगी । इनमे से 12 फीसदी की मौलिक तथा 80 फीसदी की द्वितीय भाषा होगी । इस तरह भारत तथा पाकिस्तान मे हिंदी ( उर्दु ) बोलने वालों की संख्या 1.9 बिलीयन के आसपास होगी । इसके अलावा फिजी, नेपाल, बांग्लादेश, श्री लंका, सऊदी अरब, मारिसस, सूरीनाम आदि देशों मे अच्छी संख्या मे हिंदी बोलने वाले होंगे ।

2050 तक चीन के बाद भारत विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी । किसी भी भाषा का विकास उससे संबंधित मूल देश के अर्थव्यवस्था पर निर्भर करता है । ऐतिहासिक रुप से आज तक उसी भाषा का विकास हुआ है जिसका भाषाभाषी आर्थिक रूप से संपन्न हो तथा जंसंख्या भी ज्यादा हो । चाहे कभी लैटिन या ग्रीक का मामला हो या फिर अंग्रेजी का मामला हो । तो लोग सोच साकते हैं कि मंडारिन अंतर्राष्टीय बनेगी । लेकिन ऐसा नही होगा । इसका सबसे बडा कारन है मंडारिन का कठिन होना । भाषा के विकास के लिये उसे सरल भी होनी चाहिए । मंडारिन संसार की कठिनतम भाषाओं मे से एक है । इसके विपरीत हिन्दी सरलतम तथा वैज्ञानिक भाषा है । विदेशी भाषा के रूप मे हिन्दी सीखना ज्यादा आसान है । हिन्दी दो लिपियों मे लिखी जाती है - देवनागरी तथा फारसी । इससे अरबीभाषी के लिए हिन्दी सीखना आसान होगा । उन्हे लिपि सीखने की कोई आवश्यकता नही होगी ।

रंजन राही 09350100200