| विश्व मे भाषाओं की स्थिति 2050 में ( बोलने वालों की संख्या ) | ||||
| भाषा | मातृभाषा | द्वीतीय भाषा | तृतीय भाषा | कुल (मीलियन) |
| 1. हिंदी ( उर्दु ) | 835 | 950 | 350 | 2135 |
| 2. मंडारिन (चाइनीज) | 1300 | 250 | 500 | 2050 |
| 3. अरबी | 560 | 110 | 60 | 730 |
| 4. अंग्रेजी (इंगलिश) | 310 | 130 | 250 | 690 |
| 5. स्पेनिश | 420 | 150 | 50 | 620 |
हिन्दी ( उर्दु ) 2050 तक अंतर्राष्ट्रीय भाषा होगी । एक अनुमान के अनुसार 2050 तक हिन्दी बोलने वालों की संख्या 2 बिलियन पार कर जायेगी । इसके पीछे कई मौलिक कारण हैं । मसलन भारत की जन्संख्या 1.6 बिलियन के पार होगी । इनमे से 99 फीसदी जन्संख्या हिन्दी बोलने वालों की होगी । 55 फीसदी की मौलिक भाषा होगी तथा 44 फीसदी की द्वीतीय तृतीय भाषा होगी । इसी तरह पाकिस्तान की जंसंख्या ३४ करोड़ के आसपास होगी । इनमे से 12 फीसदी की मौलिक तथा 80 फीसदी की द्वितीय भाषा होगी । इस तरह भारत तथा पाकिस्तान मे हिंदी ( उर्दु ) बोलने वालों की संख्या 1.9 बिलीयन के आसपास होगी । इसके अलावा फिजी, नेपाल, बांग्लादेश, श्री लंका, सऊदी अरब, मारिसस, सूरीनाम आदि देशों मे अच्छी संख्या मे हिंदी बोलने वाले होंगे ।
2050 तक चीन के बाद भारत विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी । किसी भी भाषा का विकास उससे संबंधित मूल देश के अर्थव्यवस्था पर निर्भर करता है । ऐतिहासिक रुप से आज तक उसी भाषा का विकास हुआ है जिसका भाषाभाषी आर्थिक रूप से संपन्न हो तथा जंसंख्या भी ज्यादा हो । चाहे कभी लैटिन या ग्रीक का मामला हो या फिर अंग्रेजी का मामला हो । तो लोग सोच साकते हैं कि मंडारिन अंतर्राष्टीय बनेगी । लेकिन ऐसा नही होगा । इसका सबसे बडा कारन है मंडारिन का कठिन होना । भाषा के विकास के लिये उसे सरल भी होनी चाहिए । मंडारिन संसार की कठिनतम भाषाओं मे से एक है । इसके विपरीत हिन्दी सरलतम तथा वैज्ञानिक भाषा है । विदेशी भाषा के रूप मे हिन्दी सीखना ज्यादा आसान है । हिन्दी दो लिपियों मे लिखी जाती है - देवनागरी तथा फारसी । इससे अरबीभाषी के लिए हिन्दी सीखना आसान होगा । उन्हे लिपि सीखने की कोई आवश्यकता नही होगी ।
रंजन राही 09350100200
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